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खेल और जंग

(1)हाथ में काली पट्टी थी ,दिलों में दर्द शहादत का।   राष्ट्रीय खेल हाॅकी ने ,बढ़ाया कद है भारत का।। (2)जंग- ए-ऐलान जब जब किया नापाक था तुमने,   हमारे हर एक फौजी ने दिया जबाव करारा था।   ये तो मैच था केवल ,एक जीत पर उड़ने वालों,   मत भूलो जब हमने ,घर में घुस के मारा था।   क्रिकेट में जीत भी गए एक मैच तो क्या,   राष्ट्रीय खेल पर उस दिन भी हक हमारा था।। (3) वतन की हार पर जश्न मनाने वाले ऐ गद्दारों,   दफन होगे जिस मिट्टी में, वो हिन्दुस्तान की होगी ।। (4)बलिदान हुए इस देश पर जो, करो उनका अपमान नहीं।     है जिसे देश से प्रेम नहीं, वो देश को भी स्वीकायॆ नहीं ।।                                               -मृणालिनी शर्मा 

आतंकवादः समस्या एवं समाधान

हिंसा ,नफरत , द्वेष तथा दहशत जब अपने चरम पर पहुंच जाता है ,तब यह आतंकवाद के रूप में उभरकर सामने आता है । यदि आतंकवाद को परिभाषित किया जाए , तो वास्तव में ' अपने आर्थिक, धार्मिक तथा राजनीतिक लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए की जाने वाली हिंसात्मक गतिविधि को आतंकवाद कहते हैं ।'                     आज भारत समेत विश्व के कई बड़े- बड़े देश भी आतंकवाद जैसी समस्या से जूझ रहे हैं । पिछले कुछ दशकों से आतंकवाद विश्व के लिए एक बडी  चुनौती बनकर उभरा है । इसमें कोई संदेह नहीं है कि आतंकवाद को किसी विशेष धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए । यह किसी विशेष धर्म के लोगों द्वारा नहीं बल्कि मानसिक रूप से बीमार लोगों द्वारा फैलाया जाता है ।लोगों के मन में अपने प्रति भय स्थापित करने ,दूसरों की जगह पर अपना आधिपत्य जमाने तथा सत्ता हथियाने के लालच में कुछ असामाजिक तत्व क्रूरता   की किसी भी हद तक जा सकते हैं ।अपने मंसूबों को कामयाब करने के लिए इन आतंकवादियों ने अब तक न जाने कितने ही लोगों के प्राणों की बलि चढा दी ।           ...

न्याय से बढ़ी उम्मीदें

5 मई ,2017 का यह दिन 'भारतीय न्याय प्रणाली' के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा । क्यों कि आज के दिन मात्र निर्भया को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देश को न्याय मिला है। 16 दिसम्बर, 2012 की रात हुई उस बर्बर और अमानवीय घटना को याद कर  सारा देश सिहर उठता है । इसी कारण निर्भया के परिवार के साथ- साथ पूरे देश को सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद थी।                                    किन्तु यह भी सत्य है ,कि इतना क्रूर अपराध करने के बाद भी दोषियों को सजा मिलने में लगभग 5 वर्ष लग गये। 10 सितम्बर, 2013 को साकेत कोर्ट ने दोषियों को सजा तो सुनाई थी ,किन्तु दोषियों ने इस फैसले को चुनौती देकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 13 मार्च, 2014 को हाईकोर्ट ने भी अपना फैसला सुनाते हुए फाँसी की सजा बरकरार रखी । इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा । 429 पेज के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया , कि  इस तरह के जघन्य अपराध करने वालों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं की जा सकती ...

स्वयं लेनी होगी जिम्मेदारी

कहते हैं कि परिवर्तन संसार का नियम है तथा समय के साथ सब कुछ बदल जाता है । मनुष्य की प्रकृति भी यही है कि  वह पुरानी चीजों में परिवर्तन देखना चाहता है , अतः वह उनमें दोष निकालना प्रारंभ कर देता है। किन्तु दूसरों में दोष निकालने से पहले हमें अपने आपको एक बार अवश्य देखना चाहिए ।             इसमें कोई संदेह नहीं है कि, हम सभी अपने देश से प्यार करते हैं तथा अपने देश का सम्मान करते हैं । तथा हम सभी अपने देश में एक सकारात्मक परिवर्तन चाहते हैं,  क्यों कि हम सब अपने देश दुनिया के सर्वश्रेष्ठ  देश के रूप में देखना चाहते हैं । किन्तु जनसंख्या, संसाधन  तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से कई देशों से आगे होने के बावजूद  हमारा देश आज भी विकासशील है तथा पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया है ।               यदि आप किसी भी आम नागरिक से इसका कारण पूछेंगे , तो वह इन सब के लिए सीधे - सीधे भ्रष्ट नेता और सरकार को ही जिम्मेदार ठहरायेगा । किन्तु अब प्रश्न यह उठता है  कि इन सब के लिए केवल सरकार को ही जिम्मेदार ठहराना कितन...

Angels in Our Life

I always had few questions in my mind and I used to ask myself ,"who are angels, do they really exist in this world ,are they visible? " These questions often came to my mind and disturbed me a lot and I'm sure that we all want to know the answers of these questions . We all want to know about angels.                Whenever I thought about angels,  these questions made me restless . But one day I met someone and got the answers of all my questions. When I met her, I realized that yes , Angels exist in this world and they are visible to everyone.And you'll be surprise to know that they are all around us. We all have angels in our life .We all are surrounded by them. We just have to find them out.                "Angels are the special agents of God." God has sent them to make this world more beautiful.  It is very easy to find your Angel .Your Angel can be among your family members ,am...

A DREAM

It was a gala day , The best day of my life. With gleaming eyes and thunderous voice, Here, my Prince arrived. My love,my world was standing there, And I just held my breath . When he casted his eyes towards me, The reason of my life accomplished. I whispered,  O! My Prince, "I'm in seventh heaven." My dream came true when I met you, I want to hold this moment. The world stopped, I stood still, He was infront of my eyes. But my happiness was short -lived, Because soon I realized. He is a king but I 'm not a queen , I built a visionary scheme. I woke up ,found no one there , Damn, it was just a dream.                                          - Mrinalini sharma

Hey ! I'M a Tree

I'm the one who gives you life, But why you forget that I'm alive. You cut me often ,don't know my worth, I save your planet, I save your earth. Air to breath and fruits to eat , I give you all you need. Yes! I eat,Yes! I breath, Don't think I 'm just a show piece. Yes,you plant me ,but just for yourself , And you show your gratitude! You cut my roots, just for my woods, O ! Man you are so rude. I help you even when I die, O ! My companion. I help you even when you die, For your cremation. Fruits and flower ,shadow and air , I give you all for free. Don't cut me friend and save me friend , Hey ! I'm a tree.                                                                         - Mrinalini sharma 

सन्यासी से सत्ता तक

                       आज बात करते हैं ,एक ऐसे सन्यासी कि जो आज राजनीतिक जगत की नई सनसनी बन चुका है।भारत से लेकर पाकिस्तान तक अगर कोई व्यक्ति आज चर्चा का केन्द्र बना हुआ है ,तो वो है उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री 'योगी  आदित्यनाथ' ।                       एक तरफ भगवा वस्त्र ,मस्तक पर तिलक, आंखों में तेज लिए एक साधु तथा दूसरी ओर प्रखर हिंदुत्ववादी ,जनसेवक ,आक्रामक शैली तथा राष्ट्रवादी छवि लिए एक निर्भीक राजनेता । यह सफर है,एक सन्यासी का जो आज भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य का मुख्यमंत्री है।                        इस सफर की शुरुआत होती है ,उत्तराखंड के कोटद्वार जिले से, जहां की पावन भूमि में 5 जून ,1972 ई0 को 'अजय सिंह बिष्ठ ' का जन्म हुआ ।अजय को बचपन से ही राजनीति में रूचि थी । इन्होंने उत्तराखंड के गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय से बीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। किन्तु शायद अजय के भाग्य में राजनी...

देशभक्ति आखिर है क्या ?

              पिछले कुछ दिनों से देश में एक नया दौर शुरू हो गया है जहां कुछ लोगों ने देश के नागरिकों को विचारधारा के आधार पर देशभक्त और देशद्रोही के सर्टिफिकेट देने का बीड़ा उठा रखा है । आज देश में यह बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है कि कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही  !                         किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले यह जानना आवश्यक है कि देशभक्ति आखिर है क्या ? " अपने देश के प्रति श्रद्धा, प्यार और समर्पण की भावना को देशभक्ति कहते हैं ।" और ऐसा कोई भी व्यक्ति जो किसी भी प्रकार की देश विरोधी गतिविधि में संलिप्त होता है, वह  देशद्रोही है और ऐसे किसी भी व्यक्ति के लिए इस देश में कोई जगह नहीं है ।                           किन्तु यह बिल्कुल भी उचित नहीं है कि किसी विशेष विचारधारा के प्रति सहमति या असहमति प्रकट करने पर कोई भी व्यक्ति भारत के आम नागरिकों की देशभक्ति पर प्रश्नचिह्न खड़ा करे। हाल ही ...

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किस हद तक?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है अर्थात एक ऐसा देश जहां पर लोगों को अपने अनुसार जीवन जीने और अपने विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है और यह लोकतंत्र मात्र संविधान की किताब तक ही सीमित नहीं है बल्कि प्रत्येक भारतीय के वास्तविक जीवन में भी अमल करता है । अतः इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी अगर कहा जाए कि दुनिया में अगर कोई देश सच्चे मायनों में लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करता है तो वह भारत ही है।                       भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है, अर्थात भारत का प्रत्येक नागरिक अपने विचारों को बोलकर, लिखकर  या किसी अन्य माध्यम से प्रकट करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है । किन्तु इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है  कि आप अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश विरोधी बयान बाजी या नारेबाजी  करो । अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नही है कि आप जिस देश की मिट्टी में पले -बढ़े हो,  उसी भारत माता को बाँटने की बात करो ।                   ...

नारी होना बन गया पाप

              देख के अपनी दयनीय दशा,  आता है मन में एक सवाल । बंगलौर से लेकर दिल्ली तक,  हो रहा क्यों मुझ पर अत्याचार ।।                                                                         मैं तो जननी हूँ, माता हूँ ,                                      जिस ने तुमको जन्म दिया ।                                      अबला समझ समाज ने ,                                     फिर क्यों मुझसे ही छल किया।। बुलंद शहर में दर्द भरी मेरी, न सुनी किसी ने भी पुकार । ...

राजनीति का गिरता स्तर

 वास्तव में राजनीति जनता से जुड़े रहकर जनता की सेवा करने का एक माध्यम हैं किन्तु आज कल राजनीति  धन कमाने और सम्पति जुटाने का एक माध्यम बन चुका हैं तथा आज कल राजनेता अपने राजनीतिक   फायदे के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं और इस बात का सबसें बड़ा उदाहरण यह  हैं की यदि किसी नेता के लिए बाहुबली शब्द का प्रयोग किया जाता हैं तो उसे फक्र महसूस होता हैं | बीते वर्षो में  देखा गया हैं कि राजनीति में शालीन भाषा के स्तर में काफी गिरावट आयी हैं  | यदि नेता ही शालीन और मर्यादित भाषा का प्रयोग कर अपने विचारों को जनता के मध्य प्रस्तुत नहीं करेंगे तो उन मे और अशालीन लोगो में क्या अंतर रह जाएगा|                      किन्तु चुनाव के समय शुरू राजनीतिक  घमासान  में जब नेता एक दूसरे पर शब्दों के बाण चलाते हैं तो कई बार अनुचित भाषा का भी प्रयोग कर जाते हैं| वर्तमान में कुछ शीर्ष नेता सार्वजनिक मंच पर अपने विपक्षी नेता के जैसे अभिनय करते हुए उनके व्यक्तित्व का मजाक उड़ाते हुए भी दिखते हैं| इस राजनीत...

बदलाव की आवश्यकता

वैसे तो भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है अर्थात एक ऐसा देश जहाँ धर्म के आधार पर कोई  भेदभाव नहीें होता है,एक ऐसा देश जहाँ पर लोगों को उनके कर्म के अनुसार सम्मान मिलता है ,धर्म के अनुसार नहीं। किन्तु पुराने समय में समाज के कुछ लोगों द्वारा समाज के कुछ वर्गों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता था। समाज की उपेक्षा का शिकार बनने के कारण अपने ही समाज के कुछ लोग समय के साथ प्रगति नहीं कर पाए। परिणामस्वरूप उन्हे समाज के पिछडे वर्ग के रूप मे सम्बोधित किया गया। पिछडे वर्ग के पुनर्विकास के उद्देश्य से समाज मे आरक्षण का उदय हुआ।                            देश में पिछडे वर्ग के लोगों को पिछले कुछ वर्षोें से जो आरक्षण मिल रहा है,उससे उनकी स्थिति  में सामाजिक स्तर पर सुधार हुआ, और पिछडे वर्ग के लोग आज विकसित भी हो गए । किन्तु इस जातीय आरक्षण के कारण पिछडे वर्ग के जो लोग आरक्षण का लाभ उ्ठा आज स्वाबलम्बी बन चुके हैें तथा आर्थिक रूप से विकसित हो चुके हैं उनकी पीढियाँ आजतक इस जातीय आरक्षण का लाभ उठा रहीं हैं । इसके विपरीत...