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A DREAM

It was a gala day ,
The best day of my life.
With gleaming eyes and thunderous voice,
Here, my Prince arrived.

My love,my world was standing there,
And I just held my breath .
When he casted his eyes towards me,
The reason of my life accomplished.

I whispered,  O! My Prince,
"I'm in seventh heaven."
My dream came true when I met you,
I want to hold this moment.

The world stopped, I stood still,
He was infront of my eyes.
But my happiness was short -lived,
Because soon I realized.

He is a king but I 'm not a queen ,
I built a visionary scheme.
I woke up ,found no one there ,
Damn, it was just a dream.
     
                                   - Mrinalini sharma

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किस हद तक?

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आतंकवादः समस्या एवं समाधान

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स्वयं लेनी होगी जिम्मेदारी

कहते हैं कि परिवर्तन संसार का नियम है तथा समय के साथ सब कुछ बदल जाता है । मनुष्य की प्रकृति भी यही है कि  वह पुरानी चीजों में परिवर्तन देखना चाहता है , अतः वह उनमें दोष निकालना प्रारंभ कर देता है। किन्तु दूसरों में दोष निकालने से पहले हमें अपने आपको एक बार अवश्य देखना चाहिए ।             इसमें कोई संदेह नहीं है कि, हम सभी अपने देश से प्यार करते हैं तथा अपने देश का सम्मान करते हैं । तथा हम सभी अपने देश में एक सकारात्मक परिवर्तन चाहते हैं,  क्यों कि हम सब अपने देश दुनिया के सर्वश्रेष्ठ  देश के रूप में देखना चाहते हैं । किन्तु जनसंख्या, संसाधन  तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से कई देशों से आगे होने के बावजूद  हमारा देश आज भी विकासशील है तथा पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया है ।               यदि आप किसी भी आम नागरिक से इसका कारण पूछेंगे , तो वह इन सब के लिए सीधे - सीधे भ्रष्ट नेता और सरकार को ही जिम्मेदार ठहरायेगा । किन्तु अब प्रश्न यह उठता है  कि इन सब के लिए केवल सरकार को ही जिम्मेदार ठहराना कितन...

बच्चों को सताये बोर्ड एक्जाम्स का भूत

भूतों से तो अमूमन सभी बच्चों को डर लगता है, लेकिन उनके लिए भूत से भी ज्यादा डरावना अगर कुछ होता है तो वह है बोर्ड एक्जाम्स का प्रेशर. हर साल 10वीं और 12वीं के कई बच्चे इसके चलते डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. इसकी मुख्य वजह है अभिभावकों और सम्बंधियों द्वारा बच्चों से सुबह- शाम, उठते- बैठते सिर्फ बोर्ड एक्जाम और पढ़ाई की ही बातें करना. फरवरी 2019 में होने वाले बोर्ड एक्जाम्स के लिए जो भी बच्चे इसके लिए तैयारी कर रहे हैं, उन्हें आज हम बतायेंगे इस दौरान प्रेशर से बचने के कुछ तरीके, जिससे वे तनावमुक्त होकर अपने अच्छे से तैयारी कर पायेंगे. 1.      निश्चित करें पढ़ाई का समय – बोर्ड एक्जाम्स में ज्यादा पढ़ाई करना अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए आपको हर वक्त किताब लेकर बैठना जरूरी नहीं है. हर दिन आप पढ़ने का एक समय निश्चित कर लीजिए, जिसमें की आप पूरी लगन और ईमानदारी के साथ पढ़ाई कर सकें. ऐसा करने से आप पढ़ाई के अलावा अपने बाकी कामों को भी समय दे पायेंगे और कोई हर वक्त आपको पढ़ने के लिए नहीं टोकेगा. 2.        आखिरी दिनों पर न रहें निर्भर – बोर...

योग्यता महत्वपूर्ण या जाति

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